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GST कैलकुलेटर

GST की गणना तुरंत करें। 30+ देशों के लिए स्वचालित दर पहचान के साथ किसी भी कीमत में कर जोड़ें या हटाएं।

GST कैलकुलेटर। किसी भी कीमत में तुरंत कर जोड़ें या हटाएं।
GST कैलकुलेटर किसी भी शुद्ध मूल्य पर कर जोड़ता है या कर-सहित कीमत से कर अलग निकालता है। यह शुद्ध मूल्य, कर राशि और कुल मूल्य 30 से अधिक देशों की पूर्वनिर्धारित दरों के साथ दिखाता है।

GST कैलकुलेटर क्या है?

GST कैलकुलेटर एक ऑनलाइन टूल है जो किसी भी कीमत में GST जोड़ने या GST-सहित कीमत से टैक्स निकालने की गणना तुरंत कर देता है। यह छोटे व्यापारियों, CA स्टूडेंट्स, फ्रीलांसरों और आम उपभोक्ताओं के लिए बिलिंग, इनवॉइसिंग और बजटिंग में सबसे उपयोगी टूल है।
भारत में GST (Goods and Services Tax) 1 जुलाई 2017 से लागू है और इसने VAT, सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी जैसे दर्जनों अप्रत्यक्ष करों की जगह ली है। सितंबर 2025 में GST 2.0 सुधारों के बाद, अब मुख्य रूप से तीन स्लैब हैं: 5% (आवश्यक वस्तुएँ जैसे खाद्य पदार्थ, दवाइयाँ, बीमा), 18% (मानक दर — इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, कपड़े, अधिकांश सेवाएँ) और 40% (विलासिता और हानिकारक वस्तुएँ जैसे एरेटेड ड्रिंक्स, तम्बाकू, प्रीमियम कारें)। पुराने 12% और 28% स्लैब 22 सितंबर 2025 से समाप्त कर दिए गए हैं।
GST एक बहुस्तरीय कर है जो आपूर्ति श्रृंखला के हर चरण पर लगता है, लेकिन Input Tax Credit (ITC) के माध्यम से पिछले चरण में चुकाए गए टैक्स की भरपाई हो जाती है। इसलिए अंतिम उपभोक्ता ही वास्तव में GST का भुगतान करता है। हमारा GST कैलकुलेटर 30 से अधिक देशों को सपोर्ट करता है और आपके देश के अनुसार स्वचालित रूप से सही टैक्स दरें दिखाता है।

GST की गणना कैसे करें?

GST की गणना दो तरीकों से की जाती है — कीमत में GST जोड़ना (GST Exclusive से Inclusive) और कुल कीमत से GST निकालना (Reverse GST Calculation)। दोनों के लिए आपको सिर्फ दो चीज़ें चाहिए: राशि और लागू GST दर।
कीमत में GST जोड़ना:
1. वस्तु या सेवा की मूल कीमत (बिना टैक्स) पता करें। मान लीजिए कोई सेवा ₹10,000 की है।
2. लागू GST दर चुनें। अधिकांश सेवाओं पर 18% GST लगता है।
3. GST राशि निकालें: ₹10,000 × 18 ÷ 100 = ₹1,800।
4. कुल कीमत = मूल कीमत + GST = ₹10,000 + ₹1,800 = ₹11,800।
कुल कीमत से GST निकालना (Reverse GST):
1. GST-सहित कुल कीमत लें। मान लीजिए MRP ₹11,800 है और GST दर 18% है।
2. मूल कीमत = कुल कीमत ÷ (1 + GST दर/100) = ₹11,800 ÷ 1.18 = ₹10,000।
3. GST राशि = कुल कीमत - मूल कीमत = ₹11,800 - ₹10,000 = ₹1,800।
सबसे आम गलती: कई लोग GST-सहित कीमत से सीधे 18% घटा देते हैं। उदाहरण के लिए, ₹11,800 का 18% = ₹2,124 — यह गलत है। सही GST राशि ₹1,800 है क्योंकि 18% मूल कीमत (₹10,000) पर लगता है, कुल कीमत पर नहीं। ऊपर दिए गए कैलकुलेटर में राशि डालें, GST दर चुनें, और सही गणना तुरंत पाएँ।

GST गणना का सूत्र

G=P×rG = P \times r
  • GG = GST राशि (रुपयों में)
  • PP = मूल कीमत (GST के बिना, नेट प्राइस)
  • rr = GST दर दशमलव में (जैसे 18% = 0.18, 5% = 0.05)
GST-सहित कुल कीमत निकालने का सूत्र:
Ptotal=P×(1+r)P_{total} = P \times (1 + r)
उदाहरण: ₹5,000 की वस्तु पर 18% GST = ₹5,000 × 1.18 = ₹5,900 (कुल कीमत)।
Reverse GST — कुल कीमत से मूल कीमत निकालना:
P=Ptotal1+rP = \frac{P_{total}}{1 + r}
उदाहरण: ₹5,900 की MRP से मूल कीमत = ₹5,900 ÷ 1.18 = ₹5,000। GST राशि = ₹5,900 - ₹5,000 = ₹900।
CGST और SGST का विभाजन (अंतर-राज्यीय लेनदेन):
CGST=G2,SGST=G2CGST = \frac{G}{2}, \quad SGST = \frac{G}{2}
जब विक्रेता और खरीदार एक ही राज्य में हों, तो GST बराबर-बराबर CGST (केंद्रीय) और SGST (राज्य) में बँटता है। उदाहरण: ₹900 GST = ₹450 CGST + ₹450 SGST। अगर लेनदेन अंतर-राज्यीय हो (जैसे दिल्ली से मुंबई), तो पूरा ₹900 IGST के रूप में लगता है।

GST गणना के व्यावहारिक उदाहरण

दुकानदार: ₹25,000 के मोबाइल फोन पर GST बिल बनाना

एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानदार ₹25,000 (बिना टैक्स) का मोबाइल फोन बेच रहा है। GST 2.0 के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स पर 18% GST लगता है।
GST राशि = ₹25,000 × 0.18 = ₹4,500 कुल कीमत = ₹25,000 + ₹4,500 = ₹29,500
अगर खरीदार उसी राज्य में है, तो बिल पर दिखेगा: - CGST (9%) = ₹2,250 - SGST (9%) = ₹2,250
अगर खरीदार दूसरे राज्य से है: - IGST (18%) = ₹4,500
दुकानदार जो GST वसूल करता है, वह उसे सरकार को जमा करता है। लेकिन अगर उसने होलसेलर से खरीदते समय ₹20,000 पर ₹3,600 GST चुकाया है, तो Input Tax Credit के तहत वह ₹3,600 वापस क्लेम कर सकता है। उसकी वास्तविक GST देनदारी = ₹4,500 - ₹3,600 = ₹900।

फ्रीलांसर: ₹50,000 की सेवा पर GST इनवॉइस

एक वेब डेवलपर दिल्ली में रहता है और मुंबई के क्लाइंट को ₹50,000 का इनवॉइस बना रहा है। चूँकि यह अंतर-राज्यीय B2B लेनदेन है, इसलिए IGST लगेगा।
GST राशि = ₹50,000 × 0.18 = ₹9,000 इनवॉइस कुल = ₹50,000 + ₹9,000 = ₹59,000 बिल पर: IGST (18%) = ₹9,000
ध्यान दें: अगर फ्रीलांसर का वार्षिक टर्नओवर ₹20 लाख से कम है (उत्तर-पूर्वी राज्यों में ₹10 लाख), तो वह GST पंजीकरण से छूट प्राप्त कर सकता है। लेकिन अगर वह इंटर-स्टेट सप्लाई करता है, तो टर्नओवर की सीमा लागू नहीं होती और पंजीकरण अनिवार्य है।

उपभोक्ता: ₹1,180 की MRP से GST निकालना

एक ग्राहक ₹1,180 का शर्ट खरीदता है और जानना चाहता है कि इसमें कितना GST शामिल है। कपड़ों पर GST 2.0 के तहत 18% लगता है (₹1,000 से ऊपर वाले कपड़ों पर)।
मूल कीमत = ₹1,180 ÷ 1.18 = ₹1,000 GST राशि = ₹1,180 - ₹1,000 = ₹180
इसमें CGST = ₹90 और SGST = ₹90 शामिल है (अगर खरीदारी उसी राज्य में हुई)।
यह Reverse GST Calculation खास तौर पर तब काम आती है जब आप बिल चेक करना चाहते हैं, खर्चों का हिसाब रखना चाहते हैं, या यह सत्यापित करना चाहते हैं कि विक्रेता ने सही GST दर लगाई है।

GST से जुड़े ज़रूरी सुझाव

  • सही GST स्लैब की पहचान करें। GST 2.0 के बाद मुख्य रूप से तीन दरें हैं: 5% (आवश्यक वस्तुएँ — खाद्य, दवाइयाँ, बीमा), 18% (मानक दर — इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, अधिकांश सेवाएँ) और 40% (विलासिता — एरेटेड ड्रिंक्स, तम्बाकू, प्रीमियम कारें)। गलत दर लगाने पर जुर्माना और ब्याज देना पड़ सकता है।
  • Input Tax Credit (ITC) का पूरा फ़ायदा उठाएँ। आपने कच्चे माल या सेवाओं पर जो GST चुकाया है, उसे अपनी GST देनदारी से घटा सकते हैं। इसके लिए सभी खरीद इनवॉइस GST-पंजीकृत विक्रेता से लें और GSTR-2B में मिलान करें।
  • कंपोजीशन स्कीम पर विचार करें। अगर आपका वार्षिक टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से कम है (सेवाओं के लिए ₹50 लाख), तो आप कम दर पर (1-6%) GST भर सकते हैं। लेकिन इस योजना में ITC नहीं मिलता और अंतर-राज्यीय बिक्री नहीं कर सकते।
  • MRP से Reverse GST निकालने का सही तरीका जानें। MRP में GST पहले से शामिल होता है, इसलिए MRP से सीधे 18% घटाना गलत है। सही तरीका: MRP ÷ 1.18 = मूल कीमत। यह गलती बहुत आम है और गलत बिलिंग का कारण बनती है।
  • GSTR रिटर्न समय पर फाइल करें। GSTR-3B हर महीने की 20 तारीख तक (₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर) या तिमाही (QRMP स्कीम) में फाइल करनी होती है। देर से फाइल करने पर ₹50/दिन (CGST + SGST) की लेट फ़ीस लगती है।
  • E-invoicing की सीमा जानें। ₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए e-invoicing अनिवार्य है। सही HSN/SAC कोड और GSTIN के साथ इनवॉइस बनाएँ ताकि ITC क्लेम में कोई समस्या न हो।

GST से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

GST 2.0 के बाद भारत में कितनी GST दरें हैं?

सितंबर 2025 में लागू GST 2.0 सुधारों के बाद मुख्य रूप से तीन स्लैब हैं: 5% (आवश्यक वस्तुएँ — खाद्य पदार्थ, दवाइयाँ, दूध उत्पाद, बीमा, EV), 18% (मानक दर — इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, वाहन, कपड़े, अधिकांश सेवाएँ) और 40% (विलासिता एवं हानिकारक वस्तुएँ — एरेटेड ड्रिंक्स, पान मसाला, तम्बाकू, प्रीमियम कारें, याट)। पुरानी 0%, 3%, 0.25% जैसी कुछ विशेष दरें अभी भी सीमित वस्तुओं पर लागू हैं।

CGST, SGST और IGST में क्या अंतर है?

CGST (Central GST) और SGST (State GST) अंतर-राज्यीय (इंट्रा-स्टेट) लेनदेन पर लगते हैं — GST दर बराबर-बराबर केंद्र और राज्य सरकार में बँटती है। उदाहरण: दिल्ली में ₹10,000 की खरीदारी पर 18% GST = 9% CGST (₹900) + 9% SGST (₹900)। IGST (Integrated GST) अंतर-राज्यीय (इंटर-स्टेट) लेनदेन पर लगता है — पूरा टैक्स केंद्र सरकार को जाता है जो बाद में राज्य सरकार से निपटान करती है। उदाहरण: दिल्ली से मुंबई बिक्री पर 18% IGST = ₹1,800।

MRP से GST कैसे निकालें (Reverse GST)?

MRP (Maximum Retail Price) में GST पहले से शामिल होता है। GST निकालने के लिए MRP को (1 + GST दर/100) से भाग दें। उदाहरण: ₹5,900 MRP पर 18% GST: मूल कीमत = ₹5,900 ÷ 1.18 = ₹5,000। GST राशि = ₹5,900 - ₹5,000 = ₹900। सबसे आम गलती यह है कि लोग ₹5,900 का 18% (= ₹1,062) निकालते हैं — यह ₹162 ज़्यादा है और गलत है।

GST पंजीकरण कब अनिवार्य है?

GST पंजीकरण अनिवार्य है अगर: वार्षिक टर्नओवर ₹20 लाख से अधिक है (सेवा प्रदाताओं के लिए, उत्तर-पूर्वी राज्यों में ₹10 लाख), या ₹40 लाख से अधिक है (वस्तुओं के विक्रेताओं के लिए)। इसके अलावा, अंतर-राज्यीय आपूर्ति करने वाले, ई-कॉमर्स ऑपरेटर और कैज़ुअल टैक्सेबल पर्सन के लिए टर्नओवर सीमा की परवाह किए बिना पंजीकरण अनिवार्य है।

Input Tax Credit (ITC) क्या है और कैसे क्लेम करें?

Input Tax Credit वह व्यवस्था है जिसमें आप कच्चे माल, सेवाओं या व्यावसायिक खर्चों पर चुकाए गए GST को अपनी बिक्री पर वसूले गए GST से घटा सकते हैं। उदाहरण: आपने ₹1,00,000 का माल खरीदा (₹18,000 GST) और ₹1,50,000 में बेचा (₹27,000 GST)। आपकी GST देनदारी = ₹27,000 - ₹18,000 = ₹9,000। ITC क्लेम के लिए: विक्रेता GST-पंजीकृत होना चाहिए, इनवॉइस में सही GSTIN होना चाहिए, और माल/सेवा व्यावसायिक उपयोग के लिए होनी चाहिए।

क्या GST कंपोजीशन स्कीम लेना फ़ायदेमंद है?

कंपोजीशन स्कीम छोटे व्यापारियों के लिए है जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से कम है (सेवाओं के लिए ₹50 लाख)। इसमें 1% (निर्माता/व्यापारी) या 6% (सेवा प्रदाता) की कम दर पर GST भरना होता है, तिमाही रिटर्न फाइल करनी होती है, और कम कागज़ी कार्यवाही होती है। लेकिन तीन बड़ी सीमाएँ हैं: ITC नहीं मिलता, अंतर-राज्यीय बिक्री नहीं कर सकते, और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर बिक्री नहीं कर सकते।

GST बिल पर HSN कोड क्या होता है?

HSN (Harmonized System of Nomenclature) एक अंतरराष्ट्रीय कोडिंग प्रणाली है जो वस्तुओं को वर्गीकृत करती है। GST इनवॉइस पर सही HSN कोड लगाना अनिवार्य है — ₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर पर 6 अंकों का और ₹5 करोड़ से कम पर 4 अंकों का HSN कोड लगाना होता है। सेवाओं के लिए SAC (Services Accounting Code) का उपयोग किया जाता है। गलत HSN/SAC कोड लगाने पर ITC क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

GST में Reverse Charge Mechanism (RCM) क्या है?

सामान्यतः GST विक्रेता वसूल करके सरकार को जमा करता है। लेकिन Reverse Charge Mechanism में खरीदार को GST जमा करना होता है। यह तीन स्थितियों में लागू होता है: अपंजीकृत विक्रेता से खरीदारी, सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष सेवाएँ (जैसे कानूनी सेवाएँ, GTA सेवाएँ), और ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा सुविधा प्रदान की गई सेवाएँ। RCM के तहत चुकाए गए GST पर पूरा ITC क्लेम किया जा सकता है।


GST से जुड़ी प्रमुख शब्दावली

GST (वस्तु एवं सेवा कर)

भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू एकीकृत अप्रत्यक्ष कर जिसने VAT, सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी आदि की जगह ली। GST 2.0 सुधारों (सितंबर 2025) के बाद मुख्य दरें 5%, 18% और 40% हैं।

GSTIN

15 अंकों का GST Identification Number जो हर पंजीकृत व्यवसाय को दिया जाता है। पहले 2 अंक राज्य कोड, अगले 10 अंक PAN नंबर, 13वाँ अंक राज्य में पंजीकरण संख्या, 14वाँ Z (डिफ़ॉल्ट) और 15वाँ चेक डिजिट होता है।

Input Tax Credit (ITC)

व्यावसायिक खरीदारी पर चुकाए गए GST को बिक्री पर वसूले गए GST से घटाने की व्यवस्था। इससे केवल वास्तविक मूल्यवृद्धि (Value Addition) पर ही टैक्स लगता है।

HSN कोड

Harmonized System of Nomenclature — एक अंतरराष्ट्रीय कोडिंग प्रणाली जो वस्तुओं को वर्गीकृत करती है और GST बिलिंग में सही दर लगाने के लिए अनिवार्य है।

E-way Bill

₹50,000 से अधिक मूल्य के माल की ढुलाई के लिए GST पोर्टल से जारी इलेक्ट्रॉनिक बिल। इसके बिना माल का परिवहन करने पर माल और वाहन दोनों जब्त हो सकते हैं।

Reverse Charge Mechanism (RCM)

वह व्यवस्था जिसमें GST जमा करने की ज़िम्मेदारी विक्रेता की बजाय खरीदार पर होती है। यह अपंजीकृत विक्रेताओं से खरीदारी और कुछ अधिसूचित सेवाओं पर लागू होता है।

कंपोजीशन स्कीम

छोटे व्यापारियों (टर्नओवर ₹1.5 करोड़ तक) के लिए GST की सरलीकृत योजना जिसमें कम दर (1-6%) पर टैक्स भरना होता है, लेकिन ITC और अंतर-राज्यीय बिक्री की सुविधा नहीं मिलती।