GST कैलकुलेटर
GST की गणना तुरंत करें। 30+ देशों के लिए स्वचालित दर पहचान के साथ किसी भी कीमत में कर जोड़ें या हटाएं।
GST कैलकुलेटर क्या है?
GST की गणना कैसे करें?
GST गणना का सूत्र
- = GST राशि (रुपयों में)
- = मूल कीमत (GST के बिना, नेट प्राइस)
- = GST दर दशमलव में (जैसे 18% = 0.18, 5% = 0.05)
GST गणना के व्यावहारिक उदाहरण
दुकानदार: ₹25,000 के मोबाइल फोन पर GST बिल बनाना
फ्रीलांसर: ₹50,000 की सेवा पर GST इनवॉइस
उपभोक्ता: ₹1,180 की MRP से GST निकालना
GST से जुड़े ज़रूरी सुझाव
- सही GST स्लैब की पहचान करें। GST 2.0 के बाद मुख्य रूप से तीन दरें हैं: 5% (आवश्यक वस्तुएँ — खाद्य, दवाइयाँ, बीमा), 18% (मानक दर — इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, अधिकांश सेवाएँ) और 40% (विलासिता — एरेटेड ड्रिंक्स, तम्बाकू, प्रीमियम कारें)। गलत दर लगाने पर जुर्माना और ब्याज देना पड़ सकता है।
- Input Tax Credit (ITC) का पूरा फ़ायदा उठाएँ। आपने कच्चे माल या सेवाओं पर जो GST चुकाया है, उसे अपनी GST देनदारी से घटा सकते हैं। इसके लिए सभी खरीद इनवॉइस GST-पंजीकृत विक्रेता से लें और GSTR-2B में मिलान करें।
- कंपोजीशन स्कीम पर विचार करें। अगर आपका वार्षिक टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से कम है (सेवाओं के लिए ₹50 लाख), तो आप कम दर पर (1-6%) GST भर सकते हैं। लेकिन इस योजना में ITC नहीं मिलता और अंतर-राज्यीय बिक्री नहीं कर सकते।
- MRP से Reverse GST निकालने का सही तरीका जानें। MRP में GST पहले से शामिल होता है, इसलिए MRP से सीधे 18% घटाना गलत है। सही तरीका: MRP ÷ 1.18 = मूल कीमत। यह गलती बहुत आम है और गलत बिलिंग का कारण बनती है।
- GSTR रिटर्न समय पर फाइल करें। GSTR-3B हर महीने की 20 तारीख तक (₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर) या तिमाही (QRMP स्कीम) में फाइल करनी होती है। देर से फाइल करने पर ₹50/दिन (CGST + SGST) की लेट फ़ीस लगती है।
- E-invoicing की सीमा जानें। ₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए e-invoicing अनिवार्य है। सही HSN/SAC कोड और GSTIN के साथ इनवॉइस बनाएँ ताकि ITC क्लेम में कोई समस्या न हो।
GST से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
GST 2.0 के बाद भारत में कितनी GST दरें हैं?
सितंबर 2025 में लागू GST 2.0 सुधारों के बाद मुख्य रूप से तीन स्लैब हैं: 5% (आवश्यक वस्तुएँ — खाद्य पदार्थ, दवाइयाँ, दूध उत्पाद, बीमा, EV), 18% (मानक दर — इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट, वाहन, कपड़े, अधिकांश सेवाएँ) और 40% (विलासिता एवं हानिकारक वस्तुएँ — एरेटेड ड्रिंक्स, पान मसाला, तम्बाकू, प्रीमियम कारें, याट)। पुरानी 0%, 3%, 0.25% जैसी कुछ विशेष दरें अभी भी सीमित वस्तुओं पर लागू हैं।
CGST, SGST और IGST में क्या अंतर है?
CGST (Central GST) और SGST (State GST) अंतर-राज्यीय (इंट्रा-स्टेट) लेनदेन पर लगते हैं — GST दर बराबर-बराबर केंद्र और राज्य सरकार में बँटती है। उदाहरण: दिल्ली में ₹10,000 की खरीदारी पर 18% GST = 9% CGST (₹900) + 9% SGST (₹900)। IGST (Integrated GST) अंतर-राज्यीय (इंटर-स्टेट) लेनदेन पर लगता है — पूरा टैक्स केंद्र सरकार को जाता है जो बाद में राज्य सरकार से निपटान करती है। उदाहरण: दिल्ली से मुंबई बिक्री पर 18% IGST = ₹1,800।
MRP से GST कैसे निकालें (Reverse GST)?
MRP (Maximum Retail Price) में GST पहले से शामिल होता है। GST निकालने के लिए MRP को (1 + GST दर/100) से भाग दें। उदाहरण: ₹5,900 MRP पर 18% GST: मूल कीमत = ₹5,900 ÷ 1.18 = ₹5,000। GST राशि = ₹5,900 - ₹5,000 = ₹900। सबसे आम गलती यह है कि लोग ₹5,900 का 18% (= ₹1,062) निकालते हैं — यह ₹162 ज़्यादा है और गलत है।
GST पंजीकरण कब अनिवार्य है?
GST पंजीकरण अनिवार्य है अगर: वार्षिक टर्नओवर ₹20 लाख से अधिक है (सेवा प्रदाताओं के लिए, उत्तर-पूर्वी राज्यों में ₹10 लाख), या ₹40 लाख से अधिक है (वस्तुओं के विक्रेताओं के लिए)। इसके अलावा, अंतर-राज्यीय आपूर्ति करने वाले, ई-कॉमर्स ऑपरेटर और कैज़ुअल टैक्सेबल पर्सन के लिए टर्नओवर सीमा की परवाह किए बिना पंजीकरण अनिवार्य है।
Input Tax Credit (ITC) क्या है और कैसे क्लेम करें?
Input Tax Credit वह व्यवस्था है जिसमें आप कच्चे माल, सेवाओं या व्यावसायिक खर्चों पर चुकाए गए GST को अपनी बिक्री पर वसूले गए GST से घटा सकते हैं। उदाहरण: आपने ₹1,00,000 का माल खरीदा (₹18,000 GST) और ₹1,50,000 में बेचा (₹27,000 GST)। आपकी GST देनदारी = ₹27,000 - ₹18,000 = ₹9,000। ITC क्लेम के लिए: विक्रेता GST-पंजीकृत होना चाहिए, इनवॉइस में सही GSTIN होना चाहिए, और माल/सेवा व्यावसायिक उपयोग के लिए होनी चाहिए।
क्या GST कंपोजीशन स्कीम लेना फ़ायदेमंद है?
कंपोजीशन स्कीम छोटे व्यापारियों के लिए है जिनका वार्षिक टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से कम है (सेवाओं के लिए ₹50 लाख)। इसमें 1% (निर्माता/व्यापारी) या 6% (सेवा प्रदाता) की कम दर पर GST भरना होता है, तिमाही रिटर्न फाइल करनी होती है, और कम कागज़ी कार्यवाही होती है। लेकिन तीन बड़ी सीमाएँ हैं: ITC नहीं मिलता, अंतर-राज्यीय बिक्री नहीं कर सकते, और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म पर बिक्री नहीं कर सकते।
GST बिल पर HSN कोड क्या होता है?
HSN (Harmonized System of Nomenclature) एक अंतरराष्ट्रीय कोडिंग प्रणाली है जो वस्तुओं को वर्गीकृत करती है। GST इनवॉइस पर सही HSN कोड लगाना अनिवार्य है — ₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर पर 6 अंकों का और ₹5 करोड़ से कम पर 4 अंकों का HSN कोड लगाना होता है। सेवाओं के लिए SAC (Services Accounting Code) का उपयोग किया जाता है। गलत HSN/SAC कोड लगाने पर ITC क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।
GST में Reverse Charge Mechanism (RCM) क्या है?
सामान्यतः GST विक्रेता वसूल करके सरकार को जमा करता है। लेकिन Reverse Charge Mechanism में खरीदार को GST जमा करना होता है। यह तीन स्थितियों में लागू होता है: अपंजीकृत विक्रेता से खरीदारी, सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष सेवाएँ (जैसे कानूनी सेवाएँ, GTA सेवाएँ), और ई-कॉमर्स ऑपरेटर द्वारा सुविधा प्रदान की गई सेवाएँ। RCM के तहत चुकाए गए GST पर पूरा ITC क्लेम किया जा सकता है।
GST से जुड़ी प्रमुख शब्दावली
GST (वस्तु एवं सेवा कर)
भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू एकीकृत अप्रत्यक्ष कर जिसने VAT, सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी आदि की जगह ली। GST 2.0 सुधारों (सितंबर 2025) के बाद मुख्य दरें 5%, 18% और 40% हैं।
GSTIN
15 अंकों का GST Identification Number जो हर पंजीकृत व्यवसाय को दिया जाता है। पहले 2 अंक राज्य कोड, अगले 10 अंक PAN नंबर, 13वाँ अंक राज्य में पंजीकरण संख्या, 14वाँ Z (डिफ़ॉल्ट) और 15वाँ चेक डिजिट होता है।
Input Tax Credit (ITC)
व्यावसायिक खरीदारी पर चुकाए गए GST को बिक्री पर वसूले गए GST से घटाने की व्यवस्था। इससे केवल वास्तविक मूल्यवृद्धि (Value Addition) पर ही टैक्स लगता है।
HSN कोड
Harmonized System of Nomenclature — एक अंतरराष्ट्रीय कोडिंग प्रणाली जो वस्तुओं को वर्गीकृत करती है और GST बिलिंग में सही दर लगाने के लिए अनिवार्य है।
E-way Bill
₹50,000 से अधिक मूल्य के माल की ढुलाई के लिए GST पोर्टल से जारी इलेक्ट्रॉनिक बिल। इसके बिना माल का परिवहन करने पर माल और वाहन दोनों जब्त हो सकते हैं।
Reverse Charge Mechanism (RCM)
वह व्यवस्था जिसमें GST जमा करने की ज़िम्मेदारी विक्रेता की बजाय खरीदार पर होती है। यह अपंजीकृत विक्रेताओं से खरीदारी और कुछ अधिसूचित सेवाओं पर लागू होता है।
कंपोजीशन स्कीम
छोटे व्यापारियों (टर्नओवर ₹1.5 करोड़ तक) के लिए GST की सरलीकृत योजना जिसमें कम दर (1-6%) पर टैक्स भरना होता है, लेकिन ITC और अंतर-राज्यीय बिक्री की सुविधा नहीं मिलती।
