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लोन कैलकुलेटर

मासिक EMI, कुल ब्याज और कुल लागत की गणना करें। 3 लोन ऑफर की तुलना करें। फिक्स्ड और घटती किस्त दोनों।

लोन कैलकुलेटर। मासिक किस्त, कुल ब्याज और ऋण चुकौती अनुसूची।
लोन कैलकुलेटर मूलधन, ब्याज दर और अवधि के आधार पर आपकी मासिक किस्त (EMI) और कुल ब्याज लागत की गणना करता है। यह समान किस्त और घटती किस्त दोनों विधियों का समर्थन करता है तथा पूरी चुकौती अनुसूची और ऋण तुलना प्रदान करता है।

लोन कैलकुलेटर (EMI कैलकुलेटर) क्या है?

लोन कैलकुलेटर एक वित्तीय उपकरण है जो लोन राशि, ब्याज दर और अवधि के आधार पर आपकी मासिक EMI (समान मासिक किस्त), कुल ब्याज लागत और पूरा पुनर्भुगतान शेड्यूल कैलकुलेट करता है। यह पर्सनल लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन और बिजनेस लोन — सभी प्रकार के एमॉर्टाइज्ड लोन के लिए काम करता है।
लोन लेने से पहले उधार लेने की वास्तविक लागत जानना बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए, SBI से ₹5,00,000 का पर्सनल लोन 11.15% ब्याज दर पर 3 साल के लिए लेने पर मासिक EMI ₹16,388 और कुल ब्याज ₹89,968 चुकाना पड़ता है — यानी मूल लोन राशि पर लगभग 18% अतिरिक्त खर्च। लोन कैलकुलेटर इन छिपी लागतों को पहले से दिखाता है ताकि आप अलग-अलग बैंकों की पेशकशों की तुलना कर सकें और अपने बजट के अनुसार सही विकल्प चुन सकें।
भारत में अधिकांश लोन समान किस्त (फ्रेंच एमॉर्टाइजेशन/EMI) पद्धति से चलते हैं, जिसमें पूरी अवधि में मासिक भुगतान एक समान रहता है। हालाँकि, कुछ बैंक और NBFC घटती किस्त (लीनियर एमॉर्टाइजेशन) पद्धति भी देते हैं, जिसमें हर महीने मूलधन का बराबर हिस्सा चुकाया जाता है और ब्याज घटते बैलेंस पर लगता है। यह कैलकुलेटर दोनों पद्धतियों को सपोर्ट करता है और आपको उनकी तुलना करने देता है।

लोन की EMI कैसे कैलकुलेट करें?

लोन की EMI कैलकुलेट करने के लिए तीन जानकारियाँ चाहिए: लोन राशि (मूलधन), वार्षिक ब्याज दर, और लोन अवधि (महीनों या वर्षों में)। यहाँ चरण-दर-चरण प्रक्रिया दी गई है:
1. वार्षिक ब्याज दर को मासिक दर में बदलें — वार्षिक दर को 12 से विभाजित करें। उदाहरण: 12% वार्षिक = 0.12 / 12 = 0.01 (1% मासिक)।
2. कुल किस्तों की संख्या निकालें — लोन अवधि (वर्षों में) को 12 से गुणा करें। 3 साल का लोन = 36 मासिक किस्तें।
3. EMI फॉर्मूला लगाएँ — इन मानों को मानक एमॉर्टाइजेशन फॉर्मूला (अगले सेक्शन में दिया गया) में डालें।
4. कुल भुगतान निकालें — EMI को कुल किस्तों की संख्या से गुणा करें।
5. कुल ब्याज निकालें — कुल भुगतान में से मूल लोन राशि घटाएँ।
घटती किस्त (लीनियर एमॉर्टाइजेशन) पद्धति में गणना सरल है: लोन राशि को कुल महीनों से भाग दें (यह निश्चित मूलधन हिस्सा है), फिर हर महीने शेष बैलेंस पर ब्याज जोड़ें। पहली किस्त सबसे अधिक होती है और हर अगली किस्त थोड़ी कम, क्योंकि बकाया बैलेंस लगातार घटता रहता है।
उदाहरण: ₹8,00,000 का कार लोन 8.50% ब्याज दर पर 5 साल (60 महीने) के लिए। समान किस्त पद्धति में मासिक EMI ₹16,378 और कुल ब्याज ₹1,82,680। वहीं, घटती किस्त पद्धति में पहली किस्त ₹18,933 से शुरू होकर अंतिम किस्त ₹13,427 तक गिरती है, लेकिन कुल ब्याज ₹1,74,167 — यानी ₹8,513 की बचत।

लोन EMI का फॉर्मूला

EMI=P×r(1+r)n(1+r)n1EMI = P \times \frac{r(1 + r)^n}{(1 + r)^n - 1}
  • EMIEMI = समान मासिक किस्त (मूलधन + ब्याज)
  • PP = मूल लोन राशि (उधार ली गई कुल राशि)
  • rr = मासिक ब्याज दर (वार्षिक दर को 12 से विभाजित करें)
  • nn = कुल मासिक किस्तों की संख्या (लोन अवधि वर्षों में × 12)
यह फ्रेंच एमॉर्टाइजेशन फॉर्मूला है जिसका उपयोग भारत के लगभग सभी बैंक — SBI, HDFC, ICICI, बैंक ऑफ बड़ौदा — और NBFC जैसे बजाज फाइनेंस, टाटा कैपिटल करते हैं। इसमें हर किस्त उस महीने का ब्याज और मूलधन का एक हिस्सा कवर करती है, और अंतिम किस्त के बाद बैलेंस शून्य हो जाता है।
घटती किस्त (लीनियर एमॉर्टाइजेशन) पद्धति में हर महीने की किस्त इस तरह निकलती है:
Mk=Pn+(PP×(k1)n)×rM_k = \frac{P}{n} + \left(P - \frac{P \times (k - 1)}{n}\right) \times r
यहाँ k किस्त क्रमांक है (1 से n तक)। पहला हिस्सा निश्चित मूलधन है, और दूसरा हिस्सा शेष बैलेंस पर घटता ब्याज।
समान किस्त पद्धति में कुल ब्याज = (EMI × n) - P। घटती किस्त पद्धति में कुल ब्याज का फॉर्मूला:
I=P×r×(n+1)2I = \frac{P \times r \times (n + 1)}{2}
घटती किस्त पद्धति में हमेशा कुल ब्याज कम लगता है क्योंकि शुरुआती महीनों में मूलधन तेजी से चुकाया जाता है। लेकिन इसमें शुरुआती किस्तें अधिक होती हैं, इसलिए शुरू में अधिक कैश फ्लो की जरूरत होती है।
उदाहरण: ₹5,00,000 का पर्सनल लोन, 11.15% वार्षिक, 3 साल। मासिक दर = 0.1115 / 12 = 0.009292, किस्तें = 36।
EMI=5,00,000×0.009292×(1.009292)36(1.009292)36116,388EMI = 5{,}00{,}000 \times \frac{0.009292 \times (1.009292)^{36}}{(1.009292)^{36} - 1} \approx 16{,}388
3 वर्षों में कुल भुगतान ₹5,89,968 — यानी ₹89,968 सिर्फ ब्याज। यही कारण है कि ब्याज दर में 1-2% का अंतर भी हजारों रुपये बचा सकता है।

लोन EMI कैलकुलेशन के उदाहरण

पर्सनल लोन: कर्ज एकीकरण के लिए ₹3,00,000

आप ₹3,00,000 का पर्सनल लोन SBI से 11.15% ब्याज दर पर 3 साल (36 महीने) के लिए लेते हैं। समान किस्त पद्धति से मासिक EMI ₹9,833 आती है। पूरे 3 वर्षों में कुल भुगतान ₹3,53,988 — जिसमें ₹53,988 ब्याज है, यानी मूल लोन राशि पर 18% अतिरिक्त। अब अगर आप HDFC बैंक से 10.50% पर यही लोन लेते हैं, तो EMI ₹9,741 और कुल ब्याज ₹50,676 — सिर्फ बैंक बदलने से ₹3,312 की बचत। SBI में पर्सनल लोन की प्रोसेसिंग फीस लोन राशि की 1-2% + GST तक हो सकती है, इसलिए तुलना करते समय फीस भी शामिल करें।

कार लोन: ₹8,00,000 की नई कार 5 साल में

आप ₹8,00,000 की नई कार के लिए 8.50% ब्याज दर पर 60 महीने का लोन लेते हैं। समान किस्त पद्धति में मासिक EMI ₹16,378 और कुल ब्याज ₹1,82,680। अब मान लीजिए आप हर महीने ₹2,000 अतिरिक्त मूलधन भुगतान करते हैं। इससे लोन 60 महीने की बजाय लगभग 49 महीने में चुक जाएगा और कुल ब्याज ₹1,82,680 से घटकर लगभग ₹1,48,000 — यानी ₹34,680 की बचत और 11 महीने पहले लोन से मुक्ति। RBI के जनवरी 2026 के नियम के अनुसार, फ्लोटिंग रेट कार लोन पर कोई प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगता।

दो लोन ऑफर की तुलना: कौन सा सस्ता?

₹5,00,000 के पर्सनल लोन पर दो ऑफर मिले हैं। ऑफर A: HDFC बैंक से 10.50% ब्याज, 3 साल, प्रोसेसिंग फीस ₹4,500 + GST (₹5,310)। ऑफर B: बजाज फाइनेंस से 14% ब्याज, 5 साल, कोई प्रोसेसिंग फीस नहीं। पहली नजर में ऑफर B सस्ता लगता है क्योंकि EMI कम है (₹11,634 बनाम ₹16,236), लेकिन कुल लागत की तुलना करें। ऑफर A: कुल ब्याज ₹84,496 + फीस ₹5,310 = कुल उधार लागत ₹89,806। ऑफर B: कुल ब्याज ₹1,98,040, कोई फीस नहीं = कुल उधार लागत ₹1,98,040। ऑफर A ₹1,08,234 सस्ता है — भले ही EMI ज्यादा है। कम अवधि में ब्याज जमा होने का समय कम मिलता है। हमेशा कुल लागत की तुलना करें, सिर्फ EMI या ब्याज दर की नहीं।

लोन पर पैसे बचाने के सुझाव

  • लोन लेने से पहले कम से कम 3-4 बैंकों और NBFC से ब्याज दर की तुलना करें। मार्च 2026 में भारत में पर्सनल लोन दरें 9.99% (HDFC/कोटक) से 24% (NBFC) तक हैं। सिर्फ 1% कम दर ₹5 लाख के 3 साल के लोन पर ₹8,000-₹10,000 बचा सकती है।
  • जितनी छोटी अवधि चुन सकें, उतनी चुनें। ₹5,00,000 का लोन 12% पर 3 साल में लेने पर कुल ब्याज ₹99,064; वही लोन 5 साल में लेने पर ब्याज ₹1,67,334 — यानी 2 साल अधिक अवधि से 69% ज्यादा ब्याज। छोटी अवधि में EMI ज्यादा होगी, लेकिन कुल बचत बहुत अधिक होती है।
  • जब भी संभव हो, अतिरिक्त मूलधन भुगतान (प्रीपेमेंट) करें। बोनस, इन्क्रीमेंट या टैक्स रिफंड को सीधे लोन में डालें। ₹5 लाख के लोन पर हर महीने सिर्फ ₹1,000 अतिरिक्त देने से 3-5 महीने पहले लोन चुक सकता है और ₹5,000-₹12,000 ब्याज बचता है।
  • प्रीपेमेंट पेनल्टी पहले जाँचें। RBI के जनवरी 2026 के नए नियम के अनुसार, फ्लोटिंग रेट लोन (व्यक्तिगत, गैर-व्यावसायिक) पर कोई प्रीपेमेंट या फोरक्लोज़र शुल्क नहीं लगता — चाहे आंशिक भुगतान हो या पूर्ण। हालाँकि, फिक्स्ड रेट लोन पर 2-5% तक शुल्क लग सकता है।
  • CIBIL स्कोर 750 से ऊपर रखें। 750+ स्कोर पर बैंक सबसे कम ब्याज दर और तेज अप्रूवल देते हैं। 700 से नीचे होने पर दर 2-4% तक बढ़ सकती है, और 650 से नीचे होने पर लोन मिलना ही मुश्किल होता है। समय पर क्रेडिट कार्ड बिल और मौजूदा EMI चुकाना स्कोर बनाए रखने का सबसे अच्छा तरीका है।
  • प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों को लागत में शामिल करें। ICICI बैंक लोन राशि की 2% तक प्रोसेसिंग फीस लेता है, HDFC ₹6,500 + GST तक, और SBI 1-2% + GST। ₹5 लाख के लोन पर 2% फीस = ₹10,000 + GST — यह भी आपकी कुल उधार लागत का हिस्सा है।
  • सिर्फ EMI या ब्याज दर नहीं, कुल लोन लागत की तुलना करें। कम EMI अक्सर लंबी अवधि का मतलब है जिसमें ज्यादा ब्याज लगता है। कुल ब्याज प्रतिशत (कुल ब्याज ÷ लोन राशि) से असली लागत पता चलती है।

लोन EMI के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

₹5 लाख के पर्सनल लोन की EMI कितनी होगी?

₹5,00,000 के पर्सनल लोन की EMI ब्याज दर और अवधि पर निर्भर करती है। 11% ब्याज दर पर 3 साल (36 महीने) के लिए EMI लगभग ₹16,369 और कुल ब्याज ₹89,284। वहीं 14% पर 5 साल (60 महीने) के लिए EMI ₹11,634 लेकिन कुल ब्याज ₹1,98,040 — दोगुने से भी ज्यादा। छोटी अवधि में EMI अधिक होती है लेकिन कुल ब्याज काफी कम।

समान किस्त (EMI) और घटती किस्त में क्या अंतर है?

समान किस्त (फ्रेंच एमॉर्टाइजेशन) में पूरी अवधि के दौरान हर महीने एक ही राशि चुकानी होती है — शुरू में ज्यादा ब्याज और कम मूलधन, बाद में उलटा। घटती किस्त (लीनियर एमॉर्टाइजेशन) में हर महीने बराबर मूलधन चुकाया जाता है लेकिन ब्याज घटते बैलेंस पर लगता है, जिससे किस्तें समय के साथ कम होती जाती हैं। ₹5,00,000 के लोन पर 12% ब्याज और 5 साल अवधि में, समान किस्त पद्धति में कुल ब्याज ₹1,67,334 जबकि घटती किस्त में ₹1,55,000 — यानी ₹12,334 की बचत। लेकिन घटती किस्त में पहली किस्त ₹13,333 होती है जबकि समान किस्त ₹11,122।

लोन की प्रोसेसिंग फीस कितनी होती है?

भारत में मार्च 2026 में, प्रमुख बैंकों की पर्सनल लोन प्रोसेसिंग फीस: ICICI बैंक लोन राशि की 2% तक, HDFC बैंक ₹6,500 + GST तक, SBI लोन राशि की 1-2% + GST, कोटक महिंद्रा 2.5% तक। कार लोन में फीस आमतौर पर 0.5-1% तक होती है। यह फीस लोन राशि से कटती है या अलग से ली जाती है — दोनों स्थितियों में यह आपकी उधार लागत बढ़ाती है। लोन की तुलना करते समय प्रोसेसिंग फीस + GST को हमेशा शामिल करें।

क्या लोन का प्रीपेमेंट करना फायदेमंद है?

हाँ, ज्यादातर मामलों में प्रीपेमेंट फायदेमंद है। अतिरिक्त भुगतान सीधे मूलधन घटाते हैं, जिससे भविष्य की सभी किस्तों पर ब्याज कम लगता है। ₹5,00,000 के लोन पर 12% ब्याज और 5 साल अवधि में, हर महीने ₹2,000 अतिरिक्त देने से लोन लगभग 3.5 साल में चुक जाता है और ₹45,000-₹50,000 ब्याज बचता है। RBI के जनवरी 2026 के नए नियम के अनुसार, फ्लोटिंग रेट लोन पर कोई प्रीपेमेंट शुल्क नहीं लगता। लेकिन फिक्स्ड रेट लोन पर 2-5% तक फोरक्लोज़र चार्ज हो सकता है — पहले जाँचें।

लोन पात्रता कैसे तय होती है? कितनी सैलरी पर कितना लोन मिलता है?

भारत में बैंक FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio) के आधार पर पात्रता तय करते हैं — आपकी कुल EMI (मौजूदा + नई) आपकी मासिक आय के 40-50% से अधिक नहीं होनी चाहिए। सामान्य नियम: मासिक सैलरी × 10 से 24 = अधिकतम लोन राशि। उदाहरण: ₹50,000 मासिक आय पर, अधिकतम EMI ₹20,000-₹25,000 हो सकती है, जो 11% ब्याज और 5 साल अवधि पर ₹7,50,000-₹9,50,000 तक के लोन में बदलती है। CIBIL स्कोर 750+ होने पर उच्च गुणक मिलता है।

एजुकेशन लोन की EMI कब शुरू होती है और ब्याज दर कितनी है?

भारत में एजुकेशन लोन पर मोरेटोरियम पीरियड मिलता है — पढ़ाई के दौरान + कोर्स खत्म होने के 6-12 महीने बाद तक EMI शुरू नहीं होती, लेकिन ब्याज जमा होता रहता है (सिंपल इंटरेस्ट)। मार्च 2026 में एजुकेशन लोन ब्याज दरें: SBI स्कॉलर लोन 8.15% से, बैंक ऑफ बड़ौदा 7.90% से, HDFC क्रेडिला 9% से। PM विद्यालक्ष्मी योजना के तहत ₹10 लाख तक के लोन पर ₹8 लाख तक पारिवारिक आय वालों को 3% ब्याज सब्सिडी मिलती है।

EMI बाउंस होने पर क्या होता है?

EMI बाउंस होने पर तीन तरह का नुकसान होता है: पहला, बैंक ₹300-₹750 + GST तक चेक/ECS बाउंस चार्ज लगाता है। दूसरा, लेट पेमेंट पेनल्टी 1-2% प्रति माह (बकाया EMI पर) लगती है। तीसरा और सबसे गंभीर, आपका CIBIL स्कोर 30-80 अंक तक गिर सकता है। लगातार 90 दिन से अधिक बकाया रहने पर लोन NPA (Non-Performing Asset) घोषित हो सकता है। अगर EMI भरने में कठिनाई हो रही है, तो बाउंस होने से पहले बैंक से संपर्क करके EMI रिस्ट्रक्चरिंग या अवधि बढ़ाने का विकल्प माँगें।

लोन बैलेंस ट्रांसफर क्या है और कब करना चाहिए?

लोन बैलेंस ट्रांसफर में आप अपने मौजूदा लोन को किसी दूसरे बैंक में कम ब्याज दर पर ट्रांसफर करते हैं। यह फायदेमंद तब है जब: (1) नई ब्याज दर कम से कम 1.5-2% कम हो, (2) लोन अवधि का कम से कम 50% बाकी हो, और (3) ट्रांसफर की लागत (प्रोसेसिंग फीस + कानूनी शुल्क) ब्याज बचत से कम हो। उदाहरण: ₹4,00,000 का पर्सनल लोन 14% पर 4 साल बाकी है, और दूसरा बैंक 11% ऑफर करता है। ट्रांसफर से कुल ब्याज बचत ₹25,000-₹30,000 हो सकती है, जो ₹5,000-₹8,000 ट्रांसफर लागत से काफी अधिक है।


लोन से जुड़ी प्रमुख शब्दावली

EMI (समान मासिक किस्त)

हर महीने बैंक को चुकाई जाने वाली निश्चित राशि जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल होते हैं। EMI = Equated Monthly Installment।

मूलधन (Principal)

बैंक से उधार ली गई मूल राशि, बिना ब्याज या फीस के। जैसे-जैसे आप किस्तें चुकाते हैं, मूलधन बैलेंस घटता जाता है।

CIBIL स्कोर

TransUnion CIBIL द्वारा 300-900 के बीच दिया जाने वाला क्रेडिट स्कोर। 750+ स्कोर पर सबसे कम ब्याज दर और तेज लोन अप्रूवल मिलता है। EMI या क्रेडिट कार्ड भुगतान में देरी से स्कोर गिरता है।

एमॉर्टाइजेशन शेड्यूल

लोन की पूरी अवधि में हर किस्त का विस्तृत विवरण — कितना मूलधन में गया, कितना ब्याज में, और शेष बैलेंस कितना है। प्रीपेमेंट का सही समय तय करने में यह बहुत उपयोगी है।

प्रोसेसिंग फीस

लोन स्वीकृत करते समय बैंक द्वारा ली जाने वाली एकबारगी फीस, आमतौर पर लोन राशि की 0.5-2.5% + GST। यह लोन राशि से कटती है या अलग से चुकानी होती है।

फोरक्लोज़र (Foreclosure)

निर्धारित अवधि से पहले पूरे लोन का एकमुश्त भुगतान। फ्लोटिंग रेट लोन पर RBI के जनवरी 2026 के नियमानुसार कोई फोरक्लोज़र शुल्क नहीं लगता।

FOIR (Fixed Obligation to Income Ratio)

आपकी मासिक आय में से सभी EMI (मौजूदा + प्रस्तावित) का अनुपात। बैंक आमतौर पर 40-50% तक FOIR स्वीकार करते हैं। इससे अधिक होने पर लोन अस्वीकृत हो सकता है।