CGPA कैलकुलेटर — SGPA और CGPA (भारत)
UGC के 10-अंक ग्रेड स्केल पर सेमेस्टर का SGPA और संचयी CGPA निकालें। हर विषय के क्रेडिट और ग्रेड भरें, और लक्ष्य CGPA के लिए ज़रूरी औसत भी देखें।
इस सेमेस्टर के विषय
पिछला CGPA पहले से है?
8.61
18 क्रेडिट पर 155 क्रेडिट अंक
—
संचयी आँकड़ा देखने के लिए नीचे अपना पिछला CGPA भरें।
18
स्केल पर यह कहाँ बैठता है
अच्छा — मज़बूत शैक्षणिक स्थिति।
CGPA निकालने के लिए क्रेडिट भरें।
विषयवार ब्यौरा
| विषय | ग्रेड | क्रेडिट | क्रेडिट अंक |
|---|---|---|---|
| विषय 1 | A+ | 4 | 36 |
| विषय 2 | A+ | 4 | 36 |
| विषय 3 | A | 3 | 24 |
| विषय 4 | A+ | 3 | 27 |
| विषय 5 | A | 2 | 16 |
| विषय 6 | A | 2 | 16 |
| कुल | 18 | 155 | |
लक्ष्य CGPA का अनुमान
ज़रूरी SGPA
9.5
संभव है — बाकी क्रेडिट में 9.5 का औसत चाहिए।
बाकी विषयों में कम से कम O का औसत चाहिए।
ग्रेडिंग स्केल संदर्भ
| ग्रेड | अंक |
|---|---|
| O Outstanding | 10 |
| A+ Excellent | 9 |
| A Very Good | 8 |
| B+ Good | 7 |
| B Above Average | 6 |
| C Average | 5 |
| P Pass | 4 |
| F Fail | 0 |
| Ab Absent | 0 |
भारत (10-अंक CGPA) — ग्रेड अंक UGC — Guidelines for CBCS के अनुसार।
तरीका: कुल क्रेडिट अंक ÷ कुल क्रेडिट, भारत (10-अंक CGPA) पर। ग्रेड अंक UGC — Guidelines for CBCS के अनुसार।
CGPA कैलकुलेटर। UGC के 10-अंक स्केल पर सेमेस्टर का SGPA और संचयी CGPA।
यह CGPA कैलकुलेटर हर विषय के ग्रेड अंक को उसके क्रेडिट से गुणा करके सारे क्रेडिट अंक जोड़ता है और कुल क्रेडिट से भाग देता है। पिछला CGPA और पूरे किए क्रेडिट भरने पर संचयी CGPA मिलता है, और लक्ष्य ब्लॉक बताता है कि बाकी क्रेडिट में कितने औसत की ज़रूरत है।
क्रेडिट अंक ÷ कुल क्रेडिट: SGPA और CGPA असल में क्या नापते हैं
SGPA एक सेमेस्टर के हर विषय के ग्रेड अंक को उसके क्रेडिट से गुणा करके निकाला गया भारित औसत है, और CGPA वही हिसाब अब तक के सारे क्रेडिट पर फैला हुआ। CGPA का पूरा नाम Cumulative Grade Point Average है — हिंदी में संचयी ग्रेड अंक औसत। UGC के Choice Based Credit System दिशानिर्देश दोनों के लिए एक ही सूत्र देते हैं, Σ(क्रेडिट × ग्रेड अंक) ÷ Σ क्रेडिट, और उसी दस्तावेज़ में अक्षर ग्रेड की तालिका भी है: O 10, A+ 9, A 8, B+ 7, B 6, C 5, P 4 और F 0।
इस तालिका में D कहीं नहीं है। उत्तीर्ण होने वाला सबसे नीचे का ग्रेड P है, चार अंक का — इसलिए जो कैलकुलेटर भारतीय मार्कशीट के लिए D का विकल्प देता है, वह एक ऐसा अक्षर दे रहा है जो UGC की तालिका में मौजूद नहीं। परीक्षा छूट जाने पर इस पेज के ड्रॉपडाउन में Ab भी है, जिसे यह 0 अंक मानता है; UGC की तालिका में भी Ab शून्य अंक के साथ दर्ज है।
पेज खाली नहीं खुलता, एक पूरा सेमेस्टर पहले से भरा मिलता है: A+, A+, A, A+, A, A ग्रेड 4, 4, 3, 3, 2, 2 क्रेडिट पर। SGPA (इस सेमेस्टर) कार्ड पर 8.61 लिखा होता है, कुल क्रेडिट पर 18, और विषयवार ब्यौरे की पहली पंक्ति बताती है कि 4 क्रेडिट का एक A+ विषय 36 क्रेडिट अंक देता है। सेमेस्टर के 155 क्रेडिट अंक 18 क्रेडिट पर बाँटने से 8.61 आता है, और नीचे का गेज इसे अच्छा — मज़बूत शैक्षणिक स्थिति वाली पट्टी में रखता है।
क्रेडिट ही वह चीज़ है जिससे यह औसत ग्रेड के सादे औसत से अलग हो जाता है। 4 क्रेडिट के थ्योरी पेपर में मिला A+ 36 क्रेडिट अंक देता है, जबकि 2 क्रेडिट की लैब में मिला A सिर्फ़ 16 — यानी भारी पेपर आपका आँकड़ा दोगुनी ताकत से हिलाता है, और पढ़ाई का समय भी उसी हिसाब से बाँटना पड़ता है।
UGC ग्रेड अंक और सूत्र तय करता है, लेकिन CGPA को प्रतिशत में बदलने का कोई गुणक और प्रथम श्रेणी या डिस्टिंक्शन की कोई सीमा तय नहीं करता। वह हिस्सा हर यूनिवर्सिटी अपने अध्यादेश में लिखती है, और इसीलिए एक ही मार्कशीट पर दो कैलकुलेटर दो जवाब दे देते हैं। असर सूत्र पर भी पड़ता है — Leverage Edu के हिंदी पेज पर यूनिवर्सिटी वाला CGPA क्रेडिट से भारित है, पर उसी पेज पर SGPA से CGPA निकालने का तरीका सेमेस्टर की संख्या से भाग देना बताया गया है; Sharda University के ब्लॉग पर भी SGPA क्रेडिट से भारित है और CGPA सेमेस्टर की गिनती से। दोनों तरीके सिर्फ़ उस हालत में एक ही नंबर देते हैं जब हर सेमेस्टर में क्रेडिट बराबर हों — जो इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट सेमेस्टर या बैक पेपर वाले किसी भी छात्र के साथ नहीं होता। यह पेज इसीलिए आपका आँकड़ा देता है, कोई श्रेणी नहीं।
ड्रॉपडाउन के अक्षर ग्रेड, उनके अंक और 4-क्रेडिट विषय पर क्रेडिट अंक
| ग्रेड | ग्रेड अंक | 4 क्रेडिट के विषय पर क्रेडिट अंक |
|---|---|---|
| O | 10 | 40 |
| A+ | 9 | 36 |
| A | 8 | 32 |
| B+ | 7 | 28 |
| B | 6 | 24 |
| C | 5 | 20 |
| P | 4 | 16 |
| F | 0 | 0 |
| Ab (अनुपस्थित) | 0 | 0 |
कैलकुलेटर कैसे चलाएँ: विषय, पिछला CGPA और लक्ष्य
पेज के हिस्से अलग-अलग सवालों के जवाब देते हैं, और हर बदलाव के साथ नतीजा तुरंत बदलता है।
1. इस सेमेस्टर के विषय में छह पंक्तियाँ खुली मिलती हैं। हर पंक्ति में एक ग्रेड का ड्रॉपडाउन और एक क्रेडिट का खाना है। विषय जोड़ें से दस तक पंक्तियाँ बढ़ती हैं और विषय हटाएँ से घटती हैं। जिस पंक्ति में क्रेडिट 0 रह जाए, वह औसत और ब्यौरे दोनों से बाहर हो जाती है — जिस विषय का नतीजा अभी आया ही नहीं, उसे वहीं पार्क कर दें।
2. ऊपर के कार्ड पढ़ें। SGPA (इस सेमेस्टर) इसी सेमेस्टर का आँकड़ा है और कुल क्रेडिट बताता है कि यह किस भाजक पर बना है। कोई कैलकुलेट बटन नहीं है।
3. संचयी नंबर चाहिए तो पिछला CGPA पहले से है? खोलें और पिछला CGPA के साथ पूरे किए क्रेडिट भरें। जब तक क्रेडिट का खाना खाली है, CGPA (संचयी) कार्ड पर डैश और यह इशारा रहता है: संचयी आँकड़ा देखने के लिए नीचे अपना पिछला CGPA भरें। दोनों भरते ही कुल क्रेडिट इस सेमेस्टर के बजाय जोड़ा हुआ कुल दिखाने लगता है।
4. लक्ष्य CGPA का अनुमान उलटी दिशा में चलता है। चार खाने — वर्तमान CGPA, पूरे किए क्रेडिट, लक्ष्य CGPA, बाकी क्रेडिट — भरने पर ज़रूरी SGPA निकलता है और नीचे साफ़ शब्दों में फ़ैसला। पहले से भरी हालत में 8.00 पर 60 क्रेडिट और 8.75 का लक्ष्य 60 बाकी क्रेडिट पर 9.50 माँगता है, फ़ैसला संभव है, और एक और लाइन जुड़ती है: बाकी विषयों में कम से कम O का औसत चाहिए।
5. विषयवार ब्यौरा तालिका में हर विषय का ग्रेड, क्रेडिट और क्रेडिट अंक है, आख़िर में जोड़ के साथ। यहीं पता चलता है कि कौन-सा विषय औसत को नीचे खींच रहा है।
6. सबसे नीचे स्केल पर यह कहाँ बैठता है का गेज 5, 7 और 9 पर निशान लगाता है, और ग्रेडिंग स्केल संदर्भ खोलने पर पूरी अक्षर तालिका अंकों के साथ दिखती है। पेज के पैर में एक तिरछी कड़ी भी है — किसी विषय के कच्चे अंक को हिस्से में बदलना हो तो प्रतिशत कैलकुलेटर उसी काम का है।
सात हालतें, पेज के असली नंबरों पर
जो सामने खुला मिलता है: 18 क्रेडिट पर 155 क्रेडिट अंक = SGPA 8.61
पूरा जवाब पाने के लिए कुछ छूना ज़रूरी नहीं। ग्रेड A+, A+, A, A+, A, A और क्रेडिट 4, 4, 3, 3, 2, 2 पहले से भरे हैं।
पंक्ति-दर-पंक्ति हिसाब:
- A+ × 4 क्रेडिट = 36 क्रेडिट अंक
- A+ × 4 क्रेडिट = 36 क्रेडिट अंक
- A × 3 क्रेडिट = 24 क्रेडिट अंक
- A+ × 3 क्रेडिट = 27 क्रेडिट अंक
- A × 2 क्रेडिट = 16 क्रेडिट अंक
- A × 2 क्रेडिट = 16 क्रेडिट अंक
जोड़ 155 क्रेडिट अंक, भाजक 18 क्रेडिट, और 155 ÷ 18 = 8.6111… जिसे पेज 8.61 लिखता है। CGPA (संचयी) पर डैश रहता है क्योंकि पिछला रिकॉर्ड अभी भरा नहीं गया।
पिछला CGPA 7.8 और 40 क्रेडिट जोड़ने पर संचयी CGPA 8.05
छहों विषय वैसे ही छोड़ दें और पिछला CGPA पहले से है? में 7.8 तथा 40 भर दें। पुराना रिकॉर्ड 7.8 × 40 = 312 क्रेडिट अंक लेकर आता है, इस सेमेस्टर के 155 उसमें जुड़ते हैं, और 467 ÷ 58 = 8.05 निकलता है। कुल क्रेडिट 18 से 58 हो जाता है।
दोनों कार्डों के बीच का यही फ़ासला पिछली लाइन भरने की असली वजह है। 8.61 का सेमेस्टर मेहनत का सबूत है, फिर भी चालीस क्रेडिट के रिकॉर्ड को वह 7.80 से 8.05 तक ही खींच पाता है — 0.25 का फ़र्क, क्योंकि अठारह नए क्रेडिट पूरे रिकॉर्ड का एक तिहाई भी नहीं। ट्रांसक्रिप्ट पर जुड़कर छपने वाला यही संचयी आँकड़ा है, एक सेमेस्टर का SGPA नहीं।
सारे विषय O: SGPA 10, यानी स्केल का सिरा
छहों ड्रॉपडाउन O कर दें और क्रेडिट वही रखें। हर क्रेडिट दस अंक कमाता है, इसलिए 180 ÷ 18 = 10 और गेज अपने सबसे ऊपरी सिरे पर, उत्कृष्ट पट्टी में। इसका इस्तेमाल जाँच के तौर पर करें: अगर कोई कैलकुलेटर सारे O पर 10 से कुछ और दिखाए, तो उसकी ग्रेड तालिका दस-अंक वाली नहीं है।
मिला-जुला सेमेस्टर A+ · A · B+ · B · C · P: SGPA 6.94
क्रेडिट 4, 4, 3, 3, 2, 2 वही रखते हुए ग्रेड A+, A, B+, B, C, P करें। क्रेडिट अंक बनते हैं 36, 32, 21, 18, 10 और 8 — कुल 125, और 125 ÷ 18 = 6.94, जो गेज पर संतोषजनक और अच्छा की सीमा से थोड़ा नीचे बैठता है।
ध्यान 2 क्रेडिट वाले P पर जाना चाहिए: वह पूरे सेमेस्टर में सिर्फ़ 8 क्रेडिट अंक लाया, जबकि उतने ही क्रेडिट का A 16 लाता है। छोटा पेपर आँकड़ा गिराता कम है, मगर तब भी गिराता है।
4 क्रेडिट के पेपर में F: 8.61 सीधे 6.61 पर
पहली हालत में लौटें और पहली पंक्ति का A+ बदलकर F कर दें, क्रेडिट 4 वैसे ही रहने दें। वह विषय अब 0 क्रेडिट अंक देता है, मगर उसके 4 क्रेडिट भाजक में बने रहते हैं: 119 ÷ 18 = 6.61। एक पेपर ने SGPA से पूरे 2.00 अंक ले लिए।
यही वह हिसाब है जो मार्कशीट देखकर लगाना सबसे मुश्किल है। अगर उसी विषय के क्रेडिट 0 कर दें तो पेज 8.50 दिखाएगा (119 ÷ 14) — यानी विषय को हटा देने और उसे F के साथ रखने के बीच 1.89 का फ़र्क है। UGC का सूत्र सेमेस्टर के सारे क्रेडिट पर चलता है, इसलिए यह पेज F के क्रेडिट भाजक में रखता है। कुछ यूनिवर्सिटी बैक क्लियर होने तक विषय को गिनती से बाहर रखती हैं, इसलिए अपना अध्यादेश ज़रूर देखें।
लक्ष्य 8.75: ज़रूरी SGPA 9.50, अधिकतम संभव 9.00
लक्ष्य ब्लॉक पहले से भरा मिलता है — वर्तमान CGPA 8.00, पूरे किए क्रेडिट 60, लक्ष्य CGPA 8.75, बाकी क्रेडिट 60। ज़रूरी SGPA 9.50 आता है, फ़ैसला संभव है, और साथ में सलाह: बाकी विषयों में कम से कम O का औसत चाहिए।
छत भी हिसाब से साफ़ है — बाकी साठ क्रेडिट में सीधे O लाकर CGPA 9.00 तक जाता है। यानी लक्ष्य और सबसे अच्छे संभव नतीजे के बीच पूरे 0.25 की जगह है, और 9.50 का औसत बनाए रखने के लिए बाकी लगभग हर विषय में O चाहिए।
लक्ष्य 8.50 पर 7.2 और 40 बाकी क्रेडिट: ज़रूरी 10.45 — संभव नहीं
वर्तमान CGPA 7.2, पूरे किए क्रेडिट 60, लक्ष्य 8.50 और बाकी क्रेडिट 40 भरें। ज़रूरी औसत 10.45 पर पहुँच जाता है, जो दस-अंक स्केल पर मौजूद ही नहीं — इसलिए ज़रूरी SGPA कार्ड डैश दिखाता है और नीचे फ़ैसला बदल जाता है: संभव नहीं — सर्वोच्च ग्रेड लाकर भी लक्ष्य दूर रहेगा। अधिकतम संभव 8.32।
8.32 वहीं है जहाँ चालीस क्रेडिट के सारे O एक 7.2 वाले रिकॉर्ड को पहुँचा सकते हैं। छत बचे हुए क्रेडिट से तय होती है, और वे हर सेमेस्टर घटते जाते हैं। इसीलिए यह ब्लॉक तीसरे साल के आख़िर में नहीं, पहले साल में खोलने लायक है।
दो सूत्र: औसत, और वह औसत जो आगे चाहिए
- = विषय i के क्रेडिट। भारतीय सेमेस्टर में थ्योरी पेपर आम तौर पर 3 से 4 और लैब 1 से 2 क्रेडिट के होते हैं।
- = विषय i के ग्रेड अंक — O के लिए 10, A+ के लिए 9, A के लिए 8, और इसी तरह P के लिए 4 तथा F के लिए 0।
- = एक विषय के क्रेडिट अंक, वही आँकड़ा जो विषयवार ब्यौरे के आख़िरी खाने में छपता है। पहले से भरे छह विषय मिलकर 155 बनाते हैं।
- = भाजक, यानी सेमेस्टर के कुल क्रेडिट — पहले से भरी हालत में 18। F वाला विषय भी इसमें गिना जाता है।
सूत्र भारित औसत है और क्रेडिट उसका वज़न। पेज नतीजे को दो दशमलव तक गोल करता है, इसलिए 155 ÷ 18 = 8.6111… कार्ड पर 8.61 बनकर आता है। CGPA उसी सूत्र का बड़ा रूप है: पिछला CGPA अपने क्रेडिट से गुणा होकर वापस क्रेडिट अंक बनता है (7.8 × 40 = 312), उसमें इस सेमेस्टर के क्रेडिट अंक जुड़ते हैं और जोड़ पूरे क्रेडिट से बँटता है।
लक्ष्य ब्लॉक वही पहचान उलटकर हल करता है। अगर लक्ष्य पूरी डिग्री के हर क्रेडिट पर टिकना है, तो उसे क्रेडिट अंक चाहिए, आपके पास पहले से हैं, और बाक़ी बचे क्रेडिट से आना है:
यहाँ वर्तमान CGPA है, पूरे किए क्रेडिट और बाकी क्रेडिट। पहले से भरी हालत में यह (8.75 × 120 − 8.00 × 60) ÷ 60 = (1050 − 480) ÷ 60 = 9.50 देता है।
भाजक से तीन नतीजे सीधे निकलते हैं, और इसीलिए ब्लॉक सिर्फ़ नंबर नहीं, फ़ैसला भी छापता है।
1. जितना छोटा होगा, ज़रूरी औसत उतना ऊँचा — 7.2 पर 60 क्रेडिट और 40 बाकी क्रेडिट के साथ 8.50 का लक्ष्य 10.45 माँगता है।
2. ज़रूरी औसत स्केल के सबसे अच्छे ग्रेड से ऊपर चला जाए तो कार्ड डैश दिखाता है और उसकी जगह अधिकतम संभव आँकड़ा छापता है, जो वही सूत्र सीधी दिशा में सर्वोच्च ग्रेड के साथ चलाने से आता है: (7.2 × 60 + 10 × 40) ÷ 100 = 8.32।
3. बाकी क्रेडिट शून्य हो जाएँ तो भाग देने के लिए कुछ बचता ही नहीं, और लाइन बदल जाती है — कोई क्रेडिट बाकी नहीं, यह आँकड़ा अंतिम है।
जहाँ CGPA का हिसाब बिगड़ता है
- सारे सेमेस्टर के SGPA जोड़कर सेमेस्टर की संख्या से भाग देना। Leverage Edu का हिंदी पेज और Sharda University का ब्लॉग दोनों यही तरीका छापते हैं, हालाँकि उसी जगह SGPA का सूत्र क्रेडिट से भारित बताया गया है। दोनों तरीके एक ही नंबर तब देते हैं जब हर सेमेस्टर के क्रेडिट बराबर हों; प्रोजेक्ट या इंटर्नशिप वाले भारी सेमेस्टर के बाद वे अलग हो जाते हैं। सही रास्ता यही है कि पिछला CGPA अपने क्रेडिट के साथ भरें।
- ग्रेड अंक जोड़कर विषयों की संख्या से भाग देना। स्कूल की मार्कशीट में पाँच विषय बराबर वज़न के होते हैं, इसलिए हिंदी के कई पेज यही सिखाते हैं। सेमेस्टर की मार्कशीट पर हर विषय के आगे क्रेडिट छपा होता है, और उसे नज़रअंदाज़ करना उस छात्र का आँकड़ा बढ़ा देता है जिसके भारी पेपर ख़राब गए।
- बोर्ड की A1 से E2 वाली तालिका यूनिवर्सिटी की मार्कशीट पर लगाना। दसवीं-बारहवीं की ग्रेड तालिका और CBCS की अक्षर तालिका एक चीज़ नहीं हैं। सेमेस्टर की मार्कशीट पर O, A+, A, B+, B, C, P और F मिलते हैं — A1 भी नहीं, D भी नहीं।
- F वाले विषय को हिसाब से बाहर कर देना। 4 क्रेडिट के पेपर में F आने पर वह 0 क्रेडिट अंक देता है, फिर भी उसके क्रेडिट भाजक में रहते हैं: 8.61 का सेमेस्टर 6.61 हो जाता है। उसी विषय को हटा देने पर पेज 8.50 दिखाता है, और यही 1.89 का फ़र्क बैक पेपर की असली कीमत है।
- लक्ष्य ब्लॉक में इस सेमेस्टर के क्रेडिट भर देना। वहाँ पूरे किए क्रेडिट का मतलब पूरा रिकॉर्ड है और बाकी क्रेडिट का मतलब डिग्री का बचा हुआ हिस्सा — ऊपर भरी छह पंक्तियाँ नहीं। दोनों हिस्से अलग गणनाएँ हैं।
- प्रतिशत का गुणक अपने मन से मान लेना। UGC का CBCS दस्तावेज़ ग्रेड अंक और सूत्र तय करता है, प्रतिशत में बदलने का कोई नियम नहीं। आवेदन में प्रतिशत लिखने से पहले अपना अध्यादेश या ट्रांसक्रिप्ट का पिछला पन्ना देखें।
यह पेज जो नहीं बताएगा
CGPA को प्रतिशत में नहीं बदलता। UGC के CBCS दिशानिर्देशों में अक्षर ग्रेड और SGPA-CGPA का सूत्र है, प्रतिशत का कोई गुणक नहीं। वह नियम हर यूनिवर्सिटी और बोर्ड अपने अध्यादेश में लिखता है, और वही आपके ट्रांसक्रिप्ट पर लागू होता है। एक गुणक चुनकर यह पेज आपको एक आत्मविश्वास से भरा ग़लत नंबर दे सकता था; इसके बजाय यह आपका CGPA देता है और प्रतिशत का सवाल आपके अध्यादेश पर छोड़ता है।
कोई श्रेणी या डिविज़न नहीं बताता। प्रथम श्रेणी, डिस्टिंक्शन और सम्मान की सीमाएँ भी उसी अध्यादेश में तय होती हैं, UGC के दस्तावेज़ में नहीं — और अलग-अलग यूनिवर्सिटी में वे अलग हैं। गेज के नीचे लिखी पट्टी इसीलिए बताती है कि आपका आँकड़ा स्केल पर कहाँ बैठता है; श्रेणी का फ़ैसला वहाँ से नहीं आता।
आपकी यूनिवर्सिटी के अपने नियम इसे मालूम नहीं। कोई विषय औसत में गिना जाएगा या नहीं, दोबारा पास किया पेपर पुराने ग्रेड की जगह लेगा या उसके साथ जुड़ेगा, ग्रेस अंक कैसे लगते हैं, गोलाई कहाँ होती है — ये सब स्थानीय फ़ैसले हैं और एक ही सिस्टम के दो कैंपस में अलग हो सकते हैं। यहाँ का आँकड़ा मानक भारित औसत है; ट्रांसक्रिप्ट पर छपने वाला आँकड़ा आपके परीक्षा विभाग का है।
दस विषय की सीमा है। छह पंक्तियाँ खुली मिलती हैं और विषय जोड़ें दस तक ले जाता है। दस से ज़्यादा विषय वाले सेमेस्टर को दो बार में भरें, या एक ही ग्रेड वाले विषयों के क्रेडिट जोड़कर एक पंक्ति में रख दें — औसत वही आएगा।
गोलाई दो दशमलव पर होती है। 155 ÷ 18 यहाँ 8.61 है। जिस मार्कशीट पर तीसरा दशमलव काटा जाता है, वहाँ आख़िरी सौवां हिस्सा एक इकाई इधर-उधर हो सकता है, और छात्रवृत्ति की सीमा के ठीक पास बैठे आँकड़े में वही एक हिस्सा मायने रखता है।
SGPA और CGPA पर आम सवाल
CGPA कैसे निकाले?
हर विषय के ग्रेड अंक को उसके क्रेडिट से गुणा करें, सारे क्रेडिट अंक जोड़ें और कुल क्रेडिट से भाग दें। 18 क्रेडिट पर 155 क्रेडिट अंक का मतलब 155 ÷ 18 = 8.61 है।
SGPA और CGPA में क्या अंतर है?
SGPA सिर्फ़ एक सेमेस्टर के विषयों का भारित औसत है। CGPA अब तक के सारे सेमेस्टर के क्रेडिट पर बना औसत है, और नौकरी या दाख़िले में यही पढ़ा जाता है।
क्या CGPA सभी सेमेस्टर के SGPA का औसत होता है?
नहीं, जब तक हर सेमेस्टर के क्रेडिट बराबर न हों। UGC का सूत्र क्रेडिट पर चलता है, इसलिए 20 क्रेडिट वाला सेमेस्टर 14 क्रेडिट वाले से ज़्यादा वज़न रखता है। हिंदी और अंग्रेज़ी के कई पेज — Leverage Edu का हिंदी लेख और Sharda University का ब्लॉग इनमें शामिल हैं — SGPA जोड़कर सेमेस्टर की संख्या से भाग देना सिखाते हैं, और यहीं से दो कैलकुलेटरों के जवाब अलग हो जाते हैं। इस पेज पर पिछला रिकॉर्ड पिछला CGPA और पूरे किए क्रेडिट, दोनों के साथ भरा जाता है, इसलिए वज़न बना रहता है।
बैक पेपर या F आने पर SGPA कितना गिरता है?
जितने क्रेडिट का पेपर, उतनी चोट। 8.61 वाले सेमेस्टर में 4 क्रेडिट के एक पेपर का A+ बदलकर F करने पर SGPA 6.61 रह जाता है — पूरे 2.00 अंक, क्योंकि वह विषय 0 क्रेडिट अंक देता है मगर उसके 4 क्रेडिट भाजक में रहते हैं। उसी विषय को हिसाब से हटा देने पर आँकड़ा 8.50 दिखता, और यह 1.89 का फ़ासला ही बताता है कि एक बैक की कीमत मार्कशीट देखकर क्यों कम लगती है। कुछ यूनिवर्सिटी बैक क्लियर होने तक विषय को नहीं गिनतीं — अपना अध्यादेश देखें।
पिछला CGPA मिलाकर नया CGPA कैसे निकलता है?
पिछला CGPA पहले से है? खोलकर पुराना आँकड़ा और उसके क्रेडिट भरें। पेज पुराने CGPA को उसके क्रेडिट से गुणा करके वापस क्रेडिट अंक बनाता है, इस सेमेस्टर के अंक जोड़ता है और कुल क्रेडिट से बाँटता है। 40 क्रेडिट पर 7.8 का मतलब 312 क्रेडिट अंक; इस सेमेस्टर के 155 जोड़कर 467 ÷ 58 = 8.05, और कुल क्रेडिट 58 हो जाता है।
लक्ष्य CGPA के लिए कितना SGPA चाहिए?
लक्ष्य CGPA का अनुमान में वर्तमान CGPA, पूरे किए क्रेडिट, लक्ष्य और बाकी क्रेडिट भरें। 60 क्रेडिट पर 8.00 वाले छात्र को 60 बाकी क्रेडिट में 8.75 तक पहुँचने के लिए 9.50 का औसत चाहिए, और पेज ग्रेड की भाषा में भी कहता है — कम से कम O। छत भी हिसाब से निकल आती है: बाकी साठ क्रेडिट में सीधे O लाकर CGPA 9.00 तक जाएगा।
आख़िरी सेमेस्टर में CGPA कितना बढ़ सकता है?
जितने क्रेडिट बचे हैं, बस उतना। 100 क्रेडिट पर 6.0 वाले छात्र के पास 20 क्रेडिट बचे हों और लक्ष्य 9.5 हो, तो ज़रूरी औसत 27 निकलता है — दस-अंक स्केल पर असंभव, इसलिए कार्ड डैश दिखाकर लिखता है कि अधिकतम संभव 6.67 है। यही हिसाब पहले साल में लक्ष्य तय करने का सबसे मज़बूत तर्क है।
CGPA को प्रतिशत में कैसे बदलें?
यह आपकी यूनिवर्सिटी या बोर्ड के अध्यादेश से तय होता है। UGC का CBCS दस्तावेज़ ग्रेड अंक और SGPA-CGPA का सूत्र देता है, प्रतिशत में बदलने का कोई नियम नहीं देता। इसीलिए एक ही सवाल पर Leverage Edu का हिंदी पेज स्कूल और यूनिवर्सिटी के लिए दो अलग गुणक छापता है और Sharda University का ब्लॉग एक तीसरी सलाह देता है, किसी प्राधिकरण का नाम जोड़े बिना। आवेदन में प्रतिशत भरने से पहले अपने अध्यादेश या ट्रांसक्रिप्ट का पिछला पन्ना देखें, वहीं आपके संस्थान का तरीका छपा होता है। किसी एक विषय के कच्चे अंक को हिस्से में बदलना हो तो पेज के पैर की कड़ी प्रतिशत कैलकुलेटर तक ले जाती है।
7.5 CGPA का मतलब क्या है?
स्केल पर 7.5 अच्छा — मज़बूत शैक्षणिक स्थिति वाली पट्टी में बैठता है, जो 7 से 9 तक चलती है। ये पट्टियाँ स्केल के 50, 70 और 90 प्रतिशत पर कटती हैं, यानी 5, 7 और 9 पर — ये प्रथम श्रेणी या डिस्टिंक्शन नहीं हैं। आपको कौन-सी श्रेणी मिलेगी, यह आपकी यूनिवर्सिटी का अध्यादेश तय करता है, और वह अलग-अलग संस्थानों में अलग है।
क्या मार्कशीट में D ग्रेड होता है?
CBCS की अक्षर तालिका में D नहीं है। उत्तीर्ण होने वाला सबसे नीचे का ग्रेड P है, 4 अंक का, और उसके नीचे सीधे F आता है। परीक्षा छूट जाने पर इस पेज के ड्रॉपडाउन में Ab भी है, जिसे 0 अंक माना जाता है।
मेरा नतीजा यूनिवर्सिटी के आँकड़े से एक-दो सौवां हिस्सा अलग क्यों है?
अक्सर गोलाई की वजह से। यह पेज दो दशमलव तक गोल करता है, जबकि कुछ परीक्षा विभाग तीसरा दशमलव काट देते हैं, इसलिए तीसरे दशमलव पर 5 वाला आँकड़ा एक सौवां हिस्सा ऊपर बैठ सकता है। दूसरी वजह विषयों की गिनती है — दोबारा पास किया पेपर, ऑडिट विषय या ट्रांसफ़र क्रेडिट कुछ संस्थानों में औसत में जाते ही नहीं। ग्रेड, क्रेडिट और पिछला रिकॉर्ड ठीक भरे हों तो हिसाब वही रहता है जो UGC का सूत्र देता है।
क्या यह कैलकुलेटर मुफ़्त है और कितने विषय भर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, कोई साइनअप नहीं और चलाने की कोई गिनती नहीं। एक बार में दस विषय तक — छह पंक्तियाँ खुली मिलती हैं और विषय जोड़ें से चार और खुलती हैं। किसी पंक्ति के क्रेडिट 0 रखने पर वह औसत से बाहर रहती है, इसलिए जिस विषय का नतीजा नहीं आया उसे वहीं छोड़ा जा सकता है।
नंबर मिल गया, अब इसका क्या करें?
पहले विषयवार ब्यौरा पढ़ें, औसत बाद में। क्रेडिट अंक का खाना साफ़ बता देता है कि किस पर मेहनत का सबसे बड़ा फ़ल मिलेगा — 4 क्रेडिट के पेपर में एक ग्रेड ऊपर जाना 2 क्रेडिट की लैब में उतनी ही छलाँग से दोगुना कीमती है। इसके बाद लक्ष्य ब्लॉक खोलें: वह आपकी महत्वाकांक्षा को अगले सेमेस्टर के औसत में बदल देता है, और अगर वह औसत स्केल से बाहर निकल जाए तो लक्ष्य वहीं बदल लेना समझदारी है। आवेदन में आँकड़ा लिखते समय स्केल साथ लिखें — 8.05 पर 10-अंक स्केल — क्योंकि सीमा पार करते ही खाली नंबर का मतलब बदल जाता है।